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Wednesday, May 22, 2019

किताबों-वजीफों से महरूम विद्यार्थी

जब कोई विद्यार्थी एक कक्षा पास कर अगली कक्षा में प्रवेश करता है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता है. लाजिमी भी हैं. आज के बुजुर्गों को भी उनके जीवन के उस पड़ाव खुशी का अहसास हुआ होगा. अब तो सरकारी स्कूलों में आलम यह है कि  कक्षा की पढ़ाई शुरू होने के चार-पांच माह तक भी कोई एक-दो किताबें विद्यार्थियों को नहीं मिलती हैं. इस सूरत में वह कैसे पढ़ेगा, इसकी भी परवाह स्कूल और शिक्षकों को नहीं ही होती है. पूछने पर टका-सा जवाब भी तैयार रहता है कि  आने पर मिल जायेगी और  हम क्या कर सकते हैं.’ सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति (वजीफा) भी दी जाती है. 
जाहिर हैं हर हाल में नुकसान तो विद्यार्थी का ही होता है. हालांकि राज्य सरकार ने छात्राओं को साइकिलें भी दी है. अब सवाल उठता है कि किताबें इतने दिनों तक क्यों नहीं मिलतीं. किताबें मिलती तो हैं मगर स्कूल प्रबंधन की कारस्तानी सिरे नहीं चढ़ पाती. यही कह सकते हैं. तभी तो इतने लंबे समय तक किताबें नहीं मिल पातीं. आये दिन खबरें मिलती हैं कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को कई महीनों से वजीफे की राशि नहीं मिली है.
हालांकि सरकारी खजाने से तो राशि निर्गत तो हो जाती है मगर विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाती.  इस बाबत स्कूल प्रधान को समय-समय पर नोटिस भी जारी किये गये हैं. अब सीधा-सीधा सवाल उठता है कि निकास की गयी राशि आखिर जाती कहां है जो जरूरतमंदों को नहीं मिल पाती.
अगर यही अनियमितता जारी रही तब तो विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने से रहा. लिहाजा, स्कूलों की गतिविधियों के लिए विशेष रूप से किसी सरकारी मुलाजिम को प्रतिनियुक्त किया जाये. जो समय-समय पर स्कूलों के बारे में रिपोर्ट करता रहे.  

Monday, May 13, 2019

क्या हुआ स्कूल बैग के वज़न का?

पिछले दिनों मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा स्कूल के विद्यार्थियों के संबंध में निर्देश जारी किये थे. उनके स्कूल बैग के वज़न से संबंधित थे. तकरीबन छह-सात माह पहले ये निर्देश किये गये थे. इतने दिनों के अंतराल में इस पर एक सरसरी निगाह डालें कि इन निर्देशों पर कितना अमल हुआ या नहीं हुआ, तो कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.
मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया था कि पहली व दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के स्कूल बैग का वज़न 1.5 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए. वहीं तीसरी से पांचवीं जमात के बैग का वज़न दो से तीन किलो, छठी व सातवीं के लिए 4 किलो, आठवीं व नौवीं कक्षा के लिए 4.5 किलो और दसवीं कक्षा के लिए बैग का वज़न 5 किलो से ज्यादा नहीं होना प्रस्तावित था. जिस दिन जिन विषयों की पढ़ाई होनी है उससे संबंधित ही किताबें-कॉपियां लाने को कहा गया था.
आज की तारीख में हक़ीक़त कुछ और ही बयान करता है. पहली से दसवीं कक्षा तक के स्कूल बैग का मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित सीमा से कहीं अधिक है. पांचवीं-छठी कक्षा के विद्यार्थियों के स्कूल बैग का वज़न करीब छह किलो से कम तो नहीं होंगे. सूरतेहाल यह है कि आज भी अधिकांश शहरों के स्कूलों में स्थिति वही है. विद्यार्थी बैग के बोझ तले दबे जा रहे हैं.
उसपर स्कूल यानी टीचर्स की तरफ से विद्यार्थियों को हर विषय के लिए हैंड राइटिंग की एक-एक कॉपी रखने का फरमान जारी किया गया है. माना कि पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए हैंड राइटिंग ज़रूरी है. अब तो वह भी नहीं होना चाहिए क्योंकि पहली कक्षा में आने से पहले विद्यार्थियों को नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी की कक्षाएं पास करनी होती है. हद तो तब है कि दसवीं तक के विद्यार्थियों को भी हैंड राइटिंग के लिए कॉपी बनाने के लिए कहा गया है. क्या इस निर्देश को व्यावहारिक कहा जा सकता है?