Monday, May 18, 2026

गणिका


 मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ विकृतियों का भी उसी अनुपात में विकास होता रहा. सभ्य माना जाने वाला आभिजात्य वर्ग के अंतर में कुत्सित भावना को तत्कालीन समाज ने मान्यता भी दे दी. इसके कारणों में से प्रमुख था धनबल. विकास के क्रम में उनमें धन संग्रहण की भावना भी पनपती गई. समाज की उत्पत्ति समूह से हुई. समूह के प्रमुख घटक महिला एवं पुरुष थे. उल्लेखनीय है कि महिला सदैव से 'शोषण" से आक्रांत रही. यद्यपि कई ग्रंथ-पुराणों में दोनों प्राणियों को समाज में समान स्थान प्राप्त था. साथ ही, पुरुषों के विलासितापूर्ण जीवन का भी आख्यान मिलता है. इस क्रम में एक शब्द है-"गणिका". इस शब्द की उत्पत्ति "गण" अर्थात "सभी"से हुई. इस प्रकार "गणिका"का अर्थ "सबकी" या "सबके लिए" हुआ. कहते हैं कि गणिकाएँ शिक्षित, गुणी व धनाढ्य होती थी किन्तु उन्हें तो "मनोविनोद का साधन" ही समझा जाता था.महिलाओ के शोषण का, चाहे किसी भी रूप में, क्रम आज के आधुनिक युग में भी यथावत ही है.